पटना। उच्च शिक्षा के लिए वर्षों से कॉलेजों की कमी झेल रहे पटना जिले के सात प्रखंडों के छात्रों के लिए अच्छी खबर है। आगामी 1 जुलाई से अथमलगोला, बेलछी, दनियावां, घोसवरी, खुसरूपुर, मनेर और संपतचक प्रखंड में डिग्री स्तर की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही इन क्षेत्रों के हजारों छात्र-छात्राओं को स्नातक की पढ़ाई के लिए पटना शहर या अन्य स्थानों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
दरअसल, इन प्रखंडों में अब तक कोई डिग्री कॉलेज नहीं था। ऐसे में इंटरमीडिएट के बाद छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई छात्र-छात्राएं दूरी और खर्च के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को होती थी, जिनके लिए रोजाना शहर आना-जाना आसान नहीं था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अथमलगोला, बेलछी, दनियावां, घोसवरी और खुसरूपुर जैसे ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही स्नातक शिक्षा का अवसर मिलेगा। वहीं मनेर और संपतचक जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी उच्च शिक्षा का नया विकल्प उपलब्ध होगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से छात्राओं का नामांकन बढ़ेगा और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी।
जिला प्रशासन के अनुसार शुरुआती चरण में चयनित भवनों में कॉलेजों का संचालन किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए कक्षाओं, फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट, पेयजल, शौचालय, बिजली और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। कॉलेज परिसर तक पहुंचने वाले रास्तों को भी सुगम बनाने पर काम किया जा रहा है ताकि छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।
इस पहल का लाभ केवल ग्रामीण छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा। पटना शहर के प्रमुख कॉलेजों पर वर्षों से बढ़ते नामांकन का दबाव भी कम होगा। स्थानीय स्तर पर सीटें उपलब्ध होने से छात्रों को प्रवेश के लिए अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और आवागमन की समस्या से राहत मिलेगी।
जिला प्रशासन ने इन कॉलेजों के स्थायी भवन निर्माण की दिशा में भी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित प्रखंडों में भूमि चिह्नित की जा रही है, ताकि आने वाले वर्षों में आधुनिक सुविधाओं से लैस स्थायी परिसर विकसित किए जा सकें।
शिक्षा के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर डिग्री कॉलेज शुरू होने से न केवल उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं को अपने क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी मिल सकेगा।

जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम ने कहा कि राज्य सरकार के ‘सात निश्चय-3’ के तहत ‘उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य’ कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को बेहतर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, “1 जुलाई से इन सभी प्रखंडों में पूरे उत्साह, भव्यता और उत्सवी माहौल में डिग्री की पढ़ाई शुरू की जाएगी। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सजग, तत्पर और प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने बताया कि कॉलेजों के स्थायी भवन निर्माण के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम पांच एकड़ और शहरी क्षेत्रों में ढाई एकड़ भूमि चिह्नित करने का कार्य किया जा रहा है, ताकि भविष्य में आधुनिक सुविधाओं से लैस स्थायी परिसर तैयार किए जा सकें।
शिक्षा के क्षेत्र में इस पहल को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्रों को लाभ मिलेगा तथा उच्च शिक्षा तक पहुंच और अधिक आसान हो सकेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट