पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि उस राजनीतिक परंपरा की भी परीक्षा है जिसने दशकों तक इस क्षेत्र की पहचान तय की है। एक ओर भाजपा अपने मजबूत संगठन और नितिन नवीन की राजनीतिक विरासत के दम पर सीट बचाने की चुनौती का सामना कर रही है, तो दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इसे अपनी राजनीति की बड़ी अग्निपरीक्षा मान रहे हैं। वहीं राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता भी मुकाबले को त्रिकोणीय और दिलचस्प बनाने की कोशिश में हैं।
बांकीपुर का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां मतदाता कई बार स्थापित राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर चुके हैं। वर्ष 1990 इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, जब निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. रामानंद यादव ने जनता दल के रामकृपाल यादव को हराकर सभी राजनीतिक आकलनों को गलत साबित कर दिया था। उस चुनाव में कायस्थ समाज के प्रमुख नेता नवीन किशोर सिन्हा तीसरे स्थान पर रहे थे। हालांकि बाद के वर्षों में नवीन किशोर सिन्हा ने इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाई और उनके निधन के बाद उनके पुत्र एवं वर्तमान मंत्री नितिन नवीन ने भाजपा का दबदबा कायम रखा।
इस क्षेत्र ने इससे पहले भी अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए हैं। वर्ष 1957 में कांग्रेस के रामशरण साव ने जीत दर्ज की, 1972 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सुनील मुखर्जी विजयी रहे और 1985 में भी डॉ. रामानंद यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर सबको चौंका दिया था।
इसी इतिहास के कारण इस बार का उपचुनाव और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशांत किशोर दावा कर रहे हैं कि चुनाव जातीय समीकरणों से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा। वहीं भाजपा के सामने अपनी परंपरागत सीट बचाने की चुनौती है, जबकि राजद भी पूरे दमखम के साथ मुकाबले में उतरने की तैयारी कर चुका है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या बांकीपुर के मतदाता एक बार फिर नया राजनीतिक संदेश देंगे, या फिर भाजपा अपनी मजबूत संगठनात्मक ताकत और नितिन नवीन की विरासत के सहारे इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल होगी। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता चुनावी मुकाबले में कितना असर छोड़ पाते हैं। यही वजह है कि बांकीपुर का उपचुनाव बिहार की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में गिना जा रहा है।

रिपोर्ट अजीत कुमार