दानापुर। लगातार कमर दर्द, पैरों में झनझनाहट या चलने-फिरने में परेशानी को सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ये लक्षण कभी-कभी रीढ़ की हड्डी या उससे जुड़ी नसों की समस्या के संकेत हो सकते हैं। हालांकि, हर कमर दर्द गंभीर बीमारी का लक्षण नहीं होता और न ही प्रत्येक मरीज को सर्जरी की जरूरत पड़ती है। समय पर जांच, सही दिनचर्या और उचित उपचार से कई मरीजों को राहत मिल सकती है।

विश्व स्पाइन दिवस के अवसर पर दानापुर के एक होटल में आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों, उनके बचाव और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चर्चा की। इस दौरान इलाज के बाद दोबारा अपने पैरों पर चलने में सक्षम हुए मरीजों को ‘स्पाइन एम्बेसडर’ सम्मान से नवाजा गया। मरीजों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि रीढ़ की सर्जरी को लेकर मन में डर था, लेकिन उपचार के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

कमर दर्द के साथ इन लक्षणों पर भी दें ध्यान

हरि कृपा हॉस्पिटल के निदेशक एवं वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. गौतम आर. प्रसाद ने रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्पाइन संबंधी समस्या की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार महत्वपूर्ण है।

कमर या गर्दन में लगातार दर्द, हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, पैरों में कमजोरी और लंबे समय तक खड़े रहने या चलने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इन लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए जांच के बिना स्वयं किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

हर मरीज के लिए सर्जरी जरूरी नहीं

डॉ. गौतम आर. प्रसाद के अनुसार, रीढ़ की कई समस्याओं में दवा, व्यायाम और उठने-बैठने के सही तरीके अपनाने से राहत मिल सकती है। मरीज की स्थिति और बीमारी की गंभीरता के अनुसार उपचार तय किया जाता है। कुछ मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार सही समय पर उपचार कराना महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना, शारीरिक गतिविधि बनाए रखना, वजन नियंत्रित रखना और भारी सामान उठाते समय सावधानी बरतना रीढ़ के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, दर्द बढ़ने पर अपनी ओर से कठिन व्यायाम करने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

सर्जरी के डर से इलाज में न करें देरी

सेमिनार में एक मरीज ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें रीढ़ की सर्जरी को लेकर काफी डराया गया था। इसके बावजूद उन्होंने सर्जरी कराने का निर्णय लिया। उपचार के बाद उन्हें लंबे समय से हो रही परेशानी से राहत मिली और जीवन पहले से बेहतर हुआ। मरीज का अनुभव इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि सर्जरी के बारे में निर्णय डर या अफवाहों के आधार पर नहीं, बल्कि विशेषज्ञ की जांच और उचित परामर्श के बाद लेना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनएमसीएच, पटना के हड्डी रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डॉ. एनके सिंह ने रीढ़ की बीमारियों के उपचार में उपलब्ध आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने डॉ. गौतम आर. प्रसाद के कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉ. नेहा भी मौजूद रहीं।

इन लक्षणों में तुरंत लें चिकित्सकीय सहायता

कमर दर्द के साथ पेशाब या मल पर नियंत्रण में अचानक परेशानी, जांघों के बीच के हिस्से में सुन्नपन अथवा पैरों में तेजी से बढ़ती कमजोरी हो तो तुरंत अस्पताल जाएं। ये गंभीर नस संबंधी समस्या के संकेत हो सकते हैं और तत्काल चिकित्सा की जरूरत होती है।

याद रखें: कमर दर्द को लगातार सहते रहना या सर्जरी के डर से इलाज टालना उचित नहीं है। सही जांच, विशेषज्ञ की सलाह और समय पर उपचार से रीढ़ की कई समस्याओं को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट