पटना: मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की राशि जारी करने के बदले छात्रा से रिश्वत मांगने के मामले में करीब 13 साल बाद अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (निगरानी) अतुल कुमार सिंह की अदालत ने तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक उपेन्द्र शर्मा को भ्रष्टाचार का दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d) के तहत प्रत्येक आरोप में तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला वर्ष 2013 का है। विशेष लोक अभियोजक (ट्रैप) विजय भानु उर्फ पुट्टू बाबू ने बताया कि दमोदर उच्च विद्यालय, रघुनाथपुर (पालीगंज) के तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक उपेन्द्र शर्मा ने मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण छात्रा गौरवी रंजन को मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के 10 हजार रुपये का चेक देने के बदले 2,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ट्रैप टीम ने 24 जुलाई 2013 को ए.एन. कॉलेज रोड स्थित गैसोलीन पेट्रोल पंप के पास आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाहों की गवाही और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

ब्यूरो रिपोर्ट अजीत कुमार