पटना। वर्षों से अपने संस्थानों में सेवा देने के बावजूद वित्तीय असुरक्षा के बीच काम कर रहे बिहार के वित्तरहित शिक्षकों और शिक्षकेत्तरकर्मियों की समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को स्पष्ट कहा कि सरकार वित्तरहित शिक्षकों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान करेगी। इसके लिए कमिटी गठित किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी। मुख्यमंत्री के इस ऐलान को लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे वित्तरहित शिक्षक और शिक्षकेत्तरकर्मी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रहे हैं।

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित वित्तरहित शिक्षकों के अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक युवा पीढ़ी को तैयार करने और बिहार के भविष्य को गढ़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा शिक्षकों का सम्मान किया है और आगे भी उनका सम्मान बना रहेगा। वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने खुद उनसे और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत करने की बात कही। अधिकारियों को भी इस दिशा में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

वित्त रहित व्यवस्था से जुड़े शिक्षक और शिक्षकेत्तरकर्मी लंबे समय से सीमित वित्तीय संसाधनों में संस्थानों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था संभालते रहे हैं। इस दौरान कई शिक्षक और कर्मचारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कई की मृत्यु भी हो चुकी है। इसके बावजूद उनके सामने वित्तीय सुरक्षा और सेवा से जुड़ी कई समस्याएं बनी रही हैं। अब सरकार की ओर से कमिटी गठित किए जाने और प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत के आश्वासन से इन समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 15 जुलाई को एक साथ 211 डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने और 2500 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि बिहार के बच्चों को राज्य में ही बेहतर शिक्षा और शिक्षक उपलब्ध हों। उन्होंने 700 मॉडल स्कूलों में करीब 3.5 लाख बच्चों के पढ़ने तथा ‘विद्यार्थी साथी’ ऐप से 75 हजार शिक्षकों के जुड़ने की भी जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। महिलाओं के लिए महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 220 एकड़ जमीन आवंटित किए जाने की जानकारी दी।

कार्यक्रम में विधान परिषद सभापति अवधेश नारायण सिंह, विधान पार्षद प्रो. (डॉ.) नवल किशोर यादव और विधान पार्षद नीरज कुमार ने भी संबोधित किया। नवल किशोर यादव ने मुख्यमंत्री का अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न और पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वित्तरहित शिक्षक, शिक्षकेत्तरकर्मी, जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

ब्यूरो रिपोर्ट