
बिहटा। कभी इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले बिहार के अधिकांश युवाओं की पहली मंजिल दूसरे राज्यों के कॉलेज हुआ करते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। बिहटा के अमहरा स्थित नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसआईटी) में बुधवार को जब सत्र 2026-30 के करीब 700 नवप्रवेशित छात्र-छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ इंडक्शन प्रोग्राम में पहुंचे, तो मंच से सिर्फ स्वागत नहीं हुआ, बल्कि बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भर भविष्य का भरोसा भी दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी, विधान पार्षद जीवन कुमार, नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज के निदेशक कृष्ण मुरारी सिंह, एनएसएमसीएच के प्राचार्य डॉ. हरिहर दीक्षित, एनएसआईटी की निदेशक नीतू सिंह, डॉ. आर.एस. शर्मा एवं रजिस्ट्रार पवन सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

नवप्रवेशित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने कहा कि आज का दिन केवल कॉलेज में प्रवेश का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प का दिन है। इंजीनियरिंग केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और देश को नई दिशा देने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार तकनीकी शिक्षा को उद्योगों, स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है ताकि युवाओं को नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
मंत्री ने कहा कि एनएसआईटी और नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान बिहार की बदलती तस्वीर के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि जहां मेडिकल कॉलेज में 250 सीटों पर पढ़ाई हो रही है, वहीं इस इंडक्शन प्रोग्राम में लगभग 700 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें करीब 90 प्रतिशत छात्र बिहार के हैं। उन्होंने इसे राज्य के लिए गर्व का विषय बताते हुए संस्थान के निदेशक कृष्ण मुरारी सिंह के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही बिहार का भविष्य हैं। जब ये पढ़ेंगे, तभी बिहार आगे बढ़ेगा और देश में अपनी अलग पहचान बनाएगा।

विधान पार्षद जीवन कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ने का अवसर मिला है, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने सफलता का मूल मंत्र अनुशासन, निरंतर मेहनत और सीखने की ललक को बताया। उन्होंने कहा कि विकसित बिहार का सपना तभी पूरा होगा, जब यहां के तकनीकी युवा नवाचार और कौशल के बल पर नई पहचान बनाएंगे।
नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज के निदेशक कृष्ण मुरारी सिंह ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि स्वस्थ व्यक्ति के सामने सैकड़ों संभावनाएं होती हैं, लेकिन अस्वस्थ होने पर व्यक्ति के सामने केवल जीवन बचाने की चिंता रह जाती है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना होना चाहिए।
एनएसआईटी की निदेशक नीतू सिंह ने सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान केवल इंजीनियर नहीं, बल्कि जिम्मेदार और सक्षम व्यक्तित्व तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने एंटी रैगिंग, कॉलेज की शैक्षणिक नीतियों, लीडरशिप, मोटिवेशन, व्यक्तित्व विकास और अनुशासित छात्र जीवन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे पूरी मेहनत और समर्पण से पढ़ाई करेंगे तो वह दिन दूर नहीं होगा, जब उनकी और संस्थान की पहचान विश्वस्तरीय होगी।
एनएसएमसीएच के प्राचार्य डॉ. हरिहर दीक्षित, संस्थापक टीएन सिंह कॉलेज, निदेशक डॉ. आर.एस. शर्मा तथा रजिस्ट्रार पवन सिंह ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में ही रोजगारपरक और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि आधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुभवी शिक्षकों और उद्योगोन्मुखी शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के चेहरे पर नए सपनों की चमक और अभिभावकों की आंखों में अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद साफ दिखाई दी। संस्थान प्रबंधन ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यही विद्यार्थी तकनीकी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर बिहार और देश का नाम रोशन करेंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट
