मोतीहारी।

पूर्वी चंपारण की पावन धरती एक ऐतिहासिक और दिव्य क्षण की साक्षी बनी, जब विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग की प्रतिष्ठा पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। 33 फीट ऊंचा, 33 फीट विस्तार वाला और 210 मीट्रिक टन वजनी यह सहस्त्रलिंगम अब मोतिहारी की पहचान बन गया है।


इस अलौकिक अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, विद्वान आचार्य और संतजन उपस्थित रहे। महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के सचिव शायन कुणाल और उनकी सांसद पत्नी शांभवी चौधरी ने स्थापना से पूर्व विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर शिवलिंग को प्रतिष्ठित किया। जैसे ही शिवलिंग को आधार पीठ पर विराजमान किया गया, पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति और गर्व का भाव स्पष्ट झलक रहा था।


इस विराट शिवलिंग की कहानी भी उतनी ही प्रेरक है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में चयनित विशाल पत्थर को देवाधिदेव महादेव का स्वरूप देने में सात वर्षों की कठोर साधना लगी। महिला शिल्पी हेमलता देवी के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक शिल्पकारों ने इसे आकार दिया। हेमलता देवी और उनके पुत्र विनायक वेंकटरमन इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने स्वयं मोतिहारी पहुंचे। यह शिवलिंग भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक यह सुरक्षित रहे।


210 टन वजनी शिवलिंग को 96 पहियों वाली विशेष गाड़ी से लाया गया और 700 टन तथा 500 टन क्षमता वाली अत्याधुनिक क्रेनों की मदद से स्थापित किया गया। सुरक्षा और तकनीकी मानकों का विशेष ध्यान रखा गया, जिसके लिए पहले मॉक ड्रिल भी की गई थी।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि विराट रामायण मंदिर और यह शिवलिंग बिहार को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएंगे।
निश्चय ही, यह सहस्त्रलिंगम न केवल श्रद्धा का केंद्र बनेगा, बल्कि भारतीय शिल्पकला, साधना और सनातन संस्कृति की अमिट छाप के रूप में सदियों तक मानवता को प्रेरित करता रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट