
पटना जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर प्रशासन ने व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। 6 मार्च से 20 मार्च तक आयोजित होने वाले “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” के तहत जिलेभर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने समाहरणालय परिसर से ई-रिक्शा आधारित 48 जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये रथ शहर से लेकर गांव तक घूमकर लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करेंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि बेहतर विकास दर और मानव विकास सूचकांक के लिए जनसंख्या नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि इस अभियान को पूरी गंभीरता और समन्वय के साथ सफल बनाया जाए। प्रत्येक रथ सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) सामग्रियों से लैस है और इनके साथ आशा फैसिलिटेटर को जोड़ा गया है, ताकि आमजन को परिवार नियोजन से जुड़ी सेवाओं की सही जानकारी और मार्गदर्शन मिल सके।
जिले में मिशन परिवार विकास अभियान 23 फरवरी से 20 मार्च तक संचालित है। 23 फरवरी से 5 मार्च तक “दम्पति संपर्क सप्ताह” मनाया गया, जबकि 6 मार्च से 20 मार्च तक सेवा पखवाड़ा चलेगा। इस दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन से जुड़ी निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। योग्य दंपतियों को उनकी इच्छा अनुसार सेवाएं देने पर विशेष जोर रहेगा।
अभियान का मुख्य उद्देश्य कुल प्रजनन दर (टीएफआर) को कम करना और छोटे परिवार के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है। प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं, आईसीडीएस, जीविका, कल्याण विभाग और स्वयंसेवी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया है। सांसदों, विधायकों और नगर निकाय प्रतिनिधियों से भी सहयोग लेने की बात कही गई है।
पखवाड़ा के दौरान प्रति प्रखंड 120 महिला बंध्याकरण और 10 पुरुष नसबंदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल और अनुमंडल अस्पतालों के लिए महिला बंध्याकरण का लक्ष्य 120 तथा पुरुष नसबंदी का लक्ष्य 40 रखा गया है। पूरे जिले में महिला बंध्याकरण का कुल लक्ष्य 2,880 और पुरुष नसबंदी का 270 है। इस प्रकार कुल 3,150 नसबंदी/बंध्याकरण का लक्ष्य तय किया गया है।
स्वास्थ्य संस्थानों में महिला बंध्याकरण, पुरुष नसबंदी, कॉपर-टी (आईयूसीडी), गर्भनिरोधक सूई ‘अंतरा’, साप्ताहिक गोली ‘छाया’, ओसीपी (माला-एन), कंडोम (निरोध) और आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली जैसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। जिलाधिकारी ने प्री-ऑपरेटिव जांच, परामर्श और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल के लिए विशेष मेडिकल टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिविरों में बेड, पेयजल, एंबुलेंस सुविधा और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
अभियान के तहत सही उम्र में शादी, पहले बच्चे में देरी, बच्चों के बीच उचित अंतर और छोटे परिवार के लाभ जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा की जाएगी। आशा, आंगनबाड़ी सेविकाएं, जीविका दीदियां और विकास मित्र गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि लक्ष्य केवल संख्या हासिल करना नहीं, बल्कि हर योग्य दंपति तक पहुंच बनाकर उन्हें जागरूक करना है। प्रशासन ने सभी अधिकारियों और सहयोगी संगठनों से जनसंख्या स्थिरीकरण के इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।
ब्यूरो रिपोर्ट
