पटना में भ्रष्टाचार पर प्रशासन का अब तक का सबसे कड़ा वार सामने आया है। जिले में साफ संदेश दे दिया गया है कि घूसखोरी और सरकारी काम में मनमानी करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। मसौढ़ी अंचल कार्यालय में पदस्थापित राजस्व कर्मचारी राजा कुमार को गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने के बाद सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई पटना जिलाधिकारी के आदेश पर सभी अनुशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद की गई।
मामला 23 दिसंबर 2025 को उजागर हुआ था, जब निगरानी विभाग की धावा दल ने मसौढ़ी प्रखंड कार्यालय परिसर से राजा कुमार को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वे दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे अहम राजस्व मामलों को जानबूझकर लंबित रखते थे और आवेदकों से अवैध राशि की मांग करते थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
इसके बाद अंचल अधिकारी, मसौढ़ी द्वारा विस्तृत जांच कर आरोप पत्र गठित किया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर विधिवत अनुशासनिक कार्यवाही शुरू हुई, जिसमें अपर समाहर्त्ता, पटना को संचालन पदाधिकारी और अंचल अधिकारी को प्रस्तोता पदाधिकारी बनाया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन वे किसी भी आरोप का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

जांच में सभी आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह आचरण बिहार सेवा संहिता के विरुद्ध है और ऐसे कर्मचारी का सेवा में बने रहना लोकहित के खिलाफ है। इसी आधार पर बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया।
प्रशासन ने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई आम जनता के लिए एक मजबूत संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।

ब्यूरो रिपोर्ट