पटना में मद्यनिषेध कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। समाहर्ता-सह-जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. की अध्यक्षता में मद्यनिषेध एवं उत्पाद से जुड़े मामलों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूर्ण मद्यनिषेध वाले राज्य में शराब से संबंधित किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या मिलीभगत को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शराब माफियाओं और संगठित गिरोहों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा चेकपोस्ट को पूरी तरह क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान जब्त शराब के विनष्टीकरण में हो रही देरी पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताई। सहायक आयुक्त (मद्यनिषेध) द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार जिले में कुल लगभग 2,04,324 लीटर शराब विनष्टीकरण के लिए लंबित है। इसमें उत्पाद विभाग के पास करीब 32,439 लीटर, पुलिस विभाग के पास लगभग 1,69,134 लीटर तथा रेल पुलिस के पास करीब 2,750 लीटर शराब शेष है। डीएम ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए निर्देश दिया कि किसी भी हालत में अतार्किक आधार पर शराब का विनष्टीकरण लंबित न रखा जाए।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से मालसलामी, दीदारगंज, बाईपास, मनेर, बेउर, फुलवारीशरीफ, अगमकुआँ और फतुहा थाना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी थानों में पाँच-पाँच हजार लीटर से अधिक शराब विनष्टीकरण के लिए पड़ी हुई है, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने थानावार भौतिक सत्यापन कर अभियान मोड में शराब का अविलंब विनष्टीकरण कराने का आदेश दिया। डीएम ने स्पष्ट किया कि देशी शराब का अधिकतम दस दिनों में तथा विदेशी शराब का पंद्रह दिनों के भीतर विनष्टीकरण सुनिश्चित किया जाए। जिन थानों में एक हजार लीटर से अधिक शराब लंबित है, वहां विशेष ड्राइव चलाने का निर्देश दिया गया।

वाहन अधिहरण और नीलामी के मामलों में भी प्रगति असंतोषजनक पाई गई। समीक्षा में सामने आया कि वाहन अधिहरण से जुड़े 510 वाद लंबित हैं और 1,256 जब्त वाहनों का अब तक मूल्यांकन नहीं हो सका है। जिलाधिकारी ने जिला परिवहन पदाधिकारी और उत्पाद विभाग को आपसी समन्वय से तीव्र गति से वाहनों का मूल्यांकन एवं नीलामी कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि एमवीआई जब भी मूल्यांकन के लिए थानों में जाएं, उन्हें हर स्तर पर पूरा सहयोग दिया जाए और अधिहरण वादों का निष्पादन निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए।

डीएम ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को संयुक्त रूप से थानावार लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और सप्ताह में कम से कम दो दिन दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती कर विनष्टीकरण की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शराब की जब्ती, विनष्टीकरण और वाहनों के अधिहरण में किसी भी प्रकार का अंतर या गैप स्वीकार्य नहीं होगा। निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने दोहराया कि मद्यनिषेध अभियान का सफल क्रियान्वयन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शराब माफिया, बालू माफिया, भू-माफिया, संगठित गिरोहों और गैरकानूनी आर्थिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सीसीए सहित कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पटना जिला मद्यनिषेध अधिनियम के क्रियान्वयन में लगातार बेहतर कार्य कर रहा है और आगे अधिहरण वादों के निष्पादन, शराब विनष्टीकरण तथा कन्विक्शन दर बढ़ाने पर विशेष फोकस किया जाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट