खगड़िया के बेलदौर में बुधवार को प्रशासनिक अमला सिर्फ दौरे पर नहीं था, बल्कि गांव की असली तस्वीर देखने पहुंचा था। कोसी के कटाव से जूझते गांव, झोपड़ी में पढ़ते बच्चे और बदहाल डिग्री कॉलेज… डीएम विक्रम विरकर ने एक-एक समस्या को मौके पर देखा और अधिकारियों को तुरंत सुधार का आदेश दिया। सवाल अब यही है कि डीएम के सख्त निर्देशों का असर जमीन पर कितनी जल्दी दिखता है।

खगड़िया।
बेलदौर की धरती पर बुधवार को डीएम विक्रम विरकर का दौरा कई सवाल छोड़ गया। सुबह से शाम तक चले इस निरीक्षण में विकास की चमकदार तस्वीर नहीं, बल्कि गांवों की जमीनी हकीकत सामने आई।
सबसे पहले डीएम पहुंचे इतमादी पंचायत के स्वर्णपुरी गांव, जहां कोसी नदी लगातार अपना दायरा बढ़ा रही है। कटाव की मार से ग्रामीणों की जमीन नदी में समा रही है। हालात देखकर डीएम ने सिंचाई विभाग और स्थानीय अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर कटाव रोकने का काम तेज किया जाए।
लेकिन स्वर्णपुरी का सबसे बड़ा दर्द सिर्फ नदी नहीं, शिक्षा व्यवस्था भी थी।

जब डीएम प्राथमिक विद्यालय पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर वे भी हैरान रह गए। बच्चे झोपड़ी के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। ना पर्याप्त भवन, ना जरूरी सुविधाएं। एक बच्ची के सवाल—“सर, हमारा पक्का स्कूल कब बनेगा?”—ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया।
डीएम ने मौके से ही बीईओ को 15 दिनों के अंदर नए भवन का डीपीआर तैयार करने का आदेश दे दिया।
इसके बाद डीएम का काफिला पहुंचा कुर्बन पंचायत के राजकीय डिग्री कॉलेज, जहां नए सत्र की शुरुआत हुई। दीक्षारंभ कार्यक्रम में डीएम ने छात्र-छात्राओं से उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने की अपील की। लेकिन कॉलेज की बदहाल व्यवस्था देखकर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि दो महीने के अंदर क्लासरूम, शौचालय, लाइब्रेरी और लैब जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

डीएम ने इंटर विद्यालय कुर्बन का भी निरीक्षण किया। बच्चों से सीधे बातचीत कर पढ़ाई, मिड-डे मील और शिक्षकों की उपलब्धता की जानकारी ली। शिक्षकों की कमी की शिकायत मिलने पर अधिकारियों को शिक्षक व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया गया।
दौरे के अंतिम चरण में बेलदौर आईटी भवन में बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर बड़ी समीक्षा बैठक हुई। कोसी के खतरे को देखते हुए डीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा—
“इस बार बाढ़ में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी।”
बैठक में बांधों की मरम्मत, नाव और राहत सामग्री की व्यवस्था, बाढ़ चौकियों पर 24 घंटे कर्मियों की तैनाती और संवेदनशील गांवों की निगरानी जैसे कई निर्देश दिए गए।
ग्रामीणों ने कटाव, पलायन और मुआवजे का मुद्दा उठाया, जिस पर डीएम ने संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया।
अब बेलदौर के लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। क्योंकि डीएम के आदेश तो सख्त हैं, लेकिन असली परीक्षा होगी—क्या ये आदेश कागज से निकलकर गांव की जमीन तक पहुंच पाते हैं या नहीं।

ब्यूरो रिपोर्ट सुदर्शन कुमार