पटना। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना का द्वितीय दीक्षांत समारोह इस बार महज औपचारिक डिग्री वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह युवा चिकित्सकों के लिए सेवा, समर्पण और चिकित्सा नैतिकता का संदेश देने वाला प्रेरक मंच बनकर उभरा। समारोह में राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन समेत कई जनप्रतिनिधियों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया और नई पीढ़ी के डॉक्टरों को समाज के प्रति जिम्मेदारियों का बोध कराया।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से आह्वान किया कि वे अपने पेशे में करुणा, नैतिकता और संवेदनशीलता को सर्वोपरि रखें, खासकर गरीब और वंचित वर्गों के प्रति। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मरीजों का विश्वास ही किसी चिकित्सक की सबसे बड़ी पूंजी होता है।

केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने डॉक्टरों को “भगवान का दूसरा रूप” बताते हुए कहा कि वे मरीजों को केवल दवा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की उम्मीद भी देते हैं। सांसद रविशंकर प्रसाद ने एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से निकलने वाले विद्यार्थियों को देश का गौरव बताया, वहीं सांसद तारिक अनवर ने ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
संस्थान के अध्यक्ष प्रो. राधा कृष्ण धीमान और कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने एम्स पटना की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने पूर्वी भारत के प्रमुख चिकित्सा केंद्र के रूप में उभरने का लक्ष्य भी दोहराया।
समारोह का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल प्रदान करना रहा। विभिन्न पाठ्यक्रमों के सैकड़ों छात्रों को उपाधियां दी गईं, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 27 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इनमें डीएम-एमसीएच, एमडी-एमएस, एमबीबीएस और नर्सिंग पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल रहे। मंच से मेधावी छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की गई, वहीं अभिभावकों की मौजूदगी ने इस अवसर को भावुक और यादगार बना दिया।

आंकड़ों के अनुसार संस्थान में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे जटिल बीमारियों का इलाज भी अब स्थानीय स्तर पर संभव हो रहा है। वक्ताओं ने कहा कि पहले जहां गंभीर इलाज के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता था, वहीं अब एम्स पटना क्षेत्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है।
दीक्षांत समारोह ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यहां से निकलने वाले युवा डॉक्टर केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि समाज सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाले जिम्मेदार नागरिक हैं।

अजीत कुमार की रिपोर्ट