बिहटा स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एक बार फिर चिकित्सा जगत के बड़े विमर्श का केंद्र बना है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की पहल पर इंडियन एकैडमी ऑफ ट्रॉपिकल पैरासाइटोलॉजी (IATP) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “तृतीय वार्षिक बिहार ट्रोपाकॉन-2026” सम्मेलन की शुरुआत शुक्रवार को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप के साथ हुई। इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय “पैरासाइटिक इन्फेक्शन: डायग्नोसिस मैटर्स” रखा गया है, जो वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों के लिहाज से बेहद प्रासंगिक माना जा रहा है।
सम्मेलन की शुरुआत पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि ‘ग्रीन पहल’ के तहत पौधों को जल अर्पित कर की गई—जिसने पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ कार्यक्रम को एक अलग पहचान दी। आयोजन अध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मुकेश कुमार ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्ण मुरारी का संदेश पढ़ा और देशभर से आए विशेषज्ञों का स्वागत किया। अपने संदेश में कृष्ण मुरारी ने स्पष्ट किया कि संस्थान चिकित्सा अनुसंधान और ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के मंच लगातार उपलब्ध कराता रहेगा।सम्मेलन में देश के नामी चिकित्सा विशेषज्ञों की मौजूदगी ने इसकी गरिमा को और बढ़ा दिया। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रो. (डॉ.) एस. सी. परीजा (पूर्व निदेशक, जिपमर पुदुचेरी व पूर्व कुलपति, बालाजी विद्यापीठ) ने अपने संबोधन में साफ कहा कि परजीवी संक्रमण आज भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सही और समय पर निदान नहीं होने की स्थिति में ये रोग अधिक खतरनाक रूप ले सकते हैं।
कार्यक्रम में IATP बिहार चैप्टर के अध्यक्ष प्रो. डॉ. भास्कर ठाकुरिया और सचिव डॉ. प्रत्युषा के. ने भी अपने विचार रखे। इसके अलावा जिपमर के प्रो. (डॉ.) राकेश कुमार सिंह, कोलकाता स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के डॉ. अभिषेक सेनगुप्ता, एनआईआरबीआई कोलकाता के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीपन गांगुली समेत कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। एम्स पटना से अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. प्रत्युषा के. की उपस्थिति भी चर्चा का केंद्र रही।


संस्थान के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) हरिहर दीक्षित ने सम्मेलन को चिकित्सा क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे मंच डॉक्टरों को नई तकनीकों और शोध से जोड़ते हैं, जिससे मरीजों के इलाज में गुणवत्ता सुधार संभव हो पाता है। वहीं संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी—प्रो. (डॉ.) अशोक शरण (एचआर डायरेक्टर), प्रो. (डॉ.) उदय नारायण सिंह (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट), प्रो. (डॉ.) रंजीत कुमार सिंह (मेडिकल डायरेक्टर) और डीन प्रो. (डॉ.) संजय कुमार सहित कई विभागाध्यक्ष भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
पहले दिन आयोजित प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में “स्टूल माइक्रोस्कोपी टू कल्चर” विषय पर प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान इंटरैक्टिव सत्रों के जरिए नई जांच तकनीकों और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई, जिससे युवा डॉक्टरों और शोधार्थियों को विशेष लाभ मिला।
सम्मेलन के दूसरे दिन यानी 2 मई को वैज्ञानिक सत्रों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिसमें पैनल चर्चा, पोस्टर प्रेजेंटेशन और रिसर्च पेपर प्रस्तुतियां शामिल होंगी। देशभर से आए विशेषज्ञ अपने शोध निष्कर्ष साझा करेंगे और जटिल परजीवी रोगों के निदान को लेकर नई दिशा देंगे।
इस सम्मेलन में 30 से अधिक प्रख्यात वक्ता और करीब 250 डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। पीएमसीएच पटना, आईजीआईएमएस, जेएलएनएमसीएच भागलपुर, एनएमसीएच पटना, एम्स पटना और एनएसएमसीएच बिहटा सहित कई प्रमुख मेडिकल संस्थानों के डॉक्टर और विद्यार्थी इसमें सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, ‘बिहार ट्रोपाकॉन-2026’ सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि परजीवी संक्रमण जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए ज्ञान, अनुभव और नवाचार का साझा मंच बनकर उभरा है—जिसका सीधा लाभ आने वाले समय में मरीजों को मिलने की उम्मीद है।

ब्यूरो रिपोर्ट