
पटना। गंभीर बीमारी, बढ़ती उम्र और जटिल सर्जरी—इन तीनों चुनौतियों के बीच पटना के पारस हेल्थ ने एक 85 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को नई उम्मीद दी है। मरीज की किडनी में लगभग 10 सेंटीमीटर का विशाल ट्यूमर था, जो प्लीहा और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं से बुरी तरह चिपका हुआ था। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन बेहद जोखिमभरा माना जा रहा था, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक रोबोटिक तकनीक की मदद से सफल सर्जरी कर मरीज को राहत दी।
पारस हेल्थ के यूरोलॉजी विभाग की टीम ने इस जटिल किडनी ट्यूमर का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। डॉक्टरों के अनुसार, मरीज की उम्र 85 वर्ष होने के कारण सर्जरी पहले से ही चुनौतीपूर्ण थी, वहीं ट्यूमर का आकार लगभग 10 सेंटीमीटर होने और आसपास के अंगों से चिपके होने की वजह से जोखिम और बढ़ गया था।
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि इतनी अधिक उम्र में इतने बड़े और जटिल ट्यूमर को निकालना आसान नहीं था। ट्यूमर प्लीहा और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं से जुड़ा हुआ था, इसलिए ऑपरेशन के दौरान हर कदम बेहद सावधानी से उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी की सबसे बड़ी ताकत इसकी सटीकता, बेहतर विजुअल कंट्रोल और जटिल अंगों के बीच सुरक्षित तरीके से काम करने की क्षमता है। इसी तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने किडनी को पूरी तरह निकालने की प्रक्रिया को सुरक्षित और सफल तरीके से पूरा किया।
डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि आधुनिक रोबोटिक तकनीक कठिन मामलों में मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन रही है। इससे कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेजी से रिकवरी जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत फिलहाल संतोषजनक बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। मरीज के परिजनों ने सफल ऑपरेशन के बाद राहत की सांस ली और डॉक्टरों की टीम का आभार जताया।
पारस हेल्थ के जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार ने कहा कि अस्पताल अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के माध्यम से मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने इस सफल सर्जरी को टीम की दक्षता, समर्पण और चिकित्सा उत्कृष्टता का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि अब बिहार में भी रोबोटिक सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ता। इससे समय, पैसा और मानसिक तनाव—तीनों में राहत मिलती है।
अस्पताल प्रबंधन ने पूरी सर्जिकल टीम की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकें जटिल बीमारियों के इलाज में नई उम्मीद लेकर आ रही हैं और यह सफल ऑपरेशन उसी का एक मजबूत उदाहरण है।
गौरतलब है कि पारस हेल्थ पटना ने वर्ष 2013 में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। यह बिहार का पहला कॉर्पोरेट अस्पताल है, जिसे कैंसर उपचार के लिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड से लाइसेंस प्राप्त है। वर्ष 2016 में यह राज्य का पहला संस्थान बना, जिसे राष्ट्रीय मान्यता मिली। 400 से अधिक बेड, 80 आईसीयू बेड, दो उन्नत रेडियोथेरेपी मशीनें और अत्याधुनिक जांच सुविधाओं के साथ यह अस्पताल बिहार में उन्नत चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
अजीत कुमार की रिपोर्ट
