पटना। बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद हलचल भरा रहा। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में आखिरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बाजी मारते हुए सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया। दिनभर चली रणनीति, जोड़-तोड़ और सियासी बयानबाजी के बाद शाम तक तस्वीर साफ हो गई और विधानसभा परिसर में एनडीए खेमे में जश्न का माहौल दिखने लगा।
इस चुनाव में कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे, जबकि सीटें केवल पांच थीं। ऐसे में मुकाबला दिलचस्प हो गया था। एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री Nitish Kumar, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के Upendra Kushwaha, केंद्रीय मंत्री Ramnath Thakur और भाजपा नेता शिवेश कुमार मैदान में थे। वहीं महागठबंधन की तरफ से आरजेडी ने अमरेन्द्र धारी सिंह को उम्मीदवार बनाया था।
वोटिंग के दौरान ही सियासी पारा चढ़ गया था। महागठबंधन को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके चार विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। इनमें कांग्रेस के तीन और आरजेडी का एक विधायक शामिल बताया जा रहा है। इसी वजह से विपक्ष का पूरा गणित बिगड़ गया और पांचवीं सीट के लिए भी एनडीए का पलड़ा भारी हो गया।
द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती के बाद एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश कुमार की जीत भी तय हो गई। इसके साथ ही बिहार की सभी पांच सीटों पर एनडीए का कब्जा हो गया।
नतीजों के बाद विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने आरोप लगाया कि चुनाव में धनबल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि अगर उनके सभी विधायक वोट देते तो नतीजा अलग हो सकता था।
उधर जीत के बाद एनडीए नेताओं ने इसे गठबंधन की एकजुटता और मजबूत रणनीति की जीत बताया। विधानसभा परिसर में दोनों खेमों के बीच नारेबाजी भी हुई, जिससे दिनभर का सियासी माहौल और गर्म हो गया।

ब्यूरो रिपोर्ट