पटना के गांधी मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय एग्रो बिहार कृषि यांत्रिकीकरण मेला 2026 इन दिनों किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और संभावनाओं का बड़ा मंच बन गया है। तीन दिनों से चल रहे इस मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हजारों किसान आधुनिक कृषि उपकरणों, नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उपाय सीख रहे हैं। किसानों की भारी भीड़ और उत्साह इस बात का संकेत दे रहा है कि बिहार में खेती अब तेजी से आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रही है।
कृषि विभाग, बिहार द्वारा सीआईआई (CII) के सहयोग से आयोजित इस मेले में किसानों ने बड़े और छोटे कृषि यंत्रों की खरीदारी भी बड़े पैमाने पर की है। सरकार की ओर से इन यंत्रों पर अनुदान मिलने से किसानों को काफी राहत मिल रही है। अब तक 105 कृषि यंत्रों की खरीद पर लगभग 32.87 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है, जबकि इनका बाजार मूल्य करीब 93.83 लाख रुपये है। तीन दिनों में कुल 343 कृषि यंत्रों की खरीद पर 167.73 लाख रुपये से अधिक का अनुदान दिया जा चुका है।

मेले का सबसे बड़ा आकर्षण “इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर संवाद” कार्यक्रम रहा, जिसमें कृषि क्षेत्र में उभर रही नई तकनीकों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कहा कि आज कृषि क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, श्रम पर निर्भरता कम करने और आय में वृद्धि के लिए कृषि मशीनीकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती की लागत कम करने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प है। इससे डीजल की खपत घटती है और खेती अधिक किफायती बनती है। आधुनिक तकनीक से लैस यह ट्रैक्टर करीब 1.8 टन वजन वाली ट्रॉली खींचने के साथ विभिन्न कृषि उपकरणों को संचालित करने में सक्षम है।
मेले में कृषि से जुड़ी नई तकनीकों के प्रति बच्चों और युवाओं में भी उत्साह देखने को मिला। कृषि विभाग द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में पटना के विभिन्न विद्यालयों के 74 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सीनियर वर्ग में आर्मी पब्लिक स्कूल, दानापुर कैंट की रिया ने प्रथम, डॉनबास्को एकेडमी की एंजल सोनी ने द्वितीय और डीएवी पब्लिक स्कूल खगौल की जिया सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं जूनियर वर्ग में श्रीजा सरण, मान्या सिंह और श्वाती कुमारी को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिया गया। विजेताओं को नगद राशि, मोमेंटो और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
मेले में आयोजित किसान पाठशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को डिजिटल कृषि, बिहार कृषि मोबाइल ऐप, फार्मर रजिस्ट्री, जलवायु अनुकूल खेती, पक्का थ्रेसिंग फ्लोर, गोदाम निर्माण और एग्रो ड्रोन के उपयोग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। वहीं नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी कृषि योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया गया।
अब तक इस मेले में 25 हजार से अधिक किसान और आगंतुक भाग ले चुके हैं। प्रवेश निःशुल्क होने के कारण बड़ी संख्या में किसान और आम लोग यहाँ पहुंचकर आधुनिक खेती की नई तकनीकों से रूबरू हो रहे हैं। शनिवार को मेले का अंतिम दिन है, जिसमें और भी अधिक किसानों के आने की उम्मीद है।

ब्यूरो रिपोर्ट