पटना।
जब मौसम का मिजाज हर साल किसानों की चिंता बढ़ा रहा है, तब खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के रास्ते तलाशना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इसी सोच के साथ शनिवार को पटना स्थित Amity University में “बिहार–झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड 2026” का आयोजन हुआ, जहां नीति-निर्माताओं से लेकर वैज्ञानिकों और किसानों तक ने बदलती जलवायु के दौर में खेती को सुरक्षित और लाभकारी बनाने पर खुलकर चर्चा की।
कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री Ram Kripal Yadav और राज्यसभा सांसद Sanjay Kumar Jha मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मंच पर किसानों की आय, जलवायु परिवर्तन और नई कृषि तकनीकों को लेकर गंभीर मंथन हुआ।
युवाओं को खेती से जोड़ना जरूरी
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि देश ने Narendra Modi के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है और इसमें कृषि की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि बिहार में खेती को अधिक आकर्षक बनाना जरूरी है ताकि नई पीढ़ी खेत-खलिहान से जुड़े।
उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने के बजाय बिहार में ही कृषि और उससे जुड़े उद्यमों में अवसर तलाशने चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि बिहार में पारंपरिक खेती के साथ-साथ फल, सब्जी और फूलों की खेती तेजी से बढ़ रही है।
मंत्री ने कहा कि Nitish Kumar के नेतृत्व में पिछले दो दशकों में कृषि क्षेत्र में कई बड़े बदलाव हुए हैं। कृषि रोडमैप के जरिए उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार योजनाएं लागू की गई हैं।
जलवायु परिवर्तन से निपटने पर जोर
राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि जब देश में सतत कृषि पर बहुत कम चर्चा होती थी, उसी समय बिहार ने “जल-जीवन-हरियाली” कार्यक्रम के जरिए इस दिशा में पहल की।
उन्होंने कहा कि बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां कभी सूखा तो कभी बाढ़ जैसी परिस्थितियां पैदा होती हैं। इसलिए जल प्रबंधन और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
झा ने कहा कि बिहार के विकास के लिए आने वाले पांच साल बेहद अहम होंगे। अगर कृषि में पारंपरिक फसलों के साथ कैश क्रॉप्स को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की आय में बड़ा बदलाव संभव है।
वैज्ञानिकों और संस्थानों ने रखे सुझाव
कार्यक्रम में नीति विशेषज्ञों, कृषि वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सीधे किसानों की आजीविका से जुड़ा सवाल बन चुका है। उन्होंने सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के साझा प्रयास पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और सिडबी के अधिकारियों ने बताया कि किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमों को किस तरह वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिला सम्मान
कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले किसानों, संस्थाओं और स्टार्टअप को भी सम्मानित किया गया। इनमें जलवायु-अनुकूल कृषि चैंपियन, सतत जल प्रबंधन अग्रदूत, मृदा स्वास्थ्य पुरस्कार, एफपीओ उत्कृष्टता पुरस्कार, युवा कृषि उद्यमी और एग्रीटेक स्टार्टअप जैसे कई श्रेणियों में सम्मान शामिल थे।
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने यह संदेश दिया कि अगर सरकार, वैज्ञानिक संस्थान, उद्योग जगत और किसान मिलकर काम करें तो बिहार और झारखंड में खेती को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और लाभकारी बनाया जा सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट