बिहटा/पटना।
यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लेकर देशभर में छिड़ी बहस अब ज़मीनी आंदोलन का रूप लेने लगी है। फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में वायरल दावों और आशंकाओं के बीच राजधानी पटना के बिहटा में मंगलवार को विरोध की आवाज़ खुलकर सामने आई। स्वामी सहजानंद सरस्वती सीताराम आश्रम उस वक्त सियासी गर्मी का केंद्र बन गया, जब सवर्ण समाज के लोगों ने बैठक कर इस नए विनियम के खिलाफ हुंकार भरी।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे विकास ब्रह्मर्षि ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 को सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए “अभिशाप” करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि समानता के नाम पर यह नियम समाज को बांटने, बैकवर्ड-फॉरवर्ड को आमने-सामने खड़ा करने और हिंदू समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश है।
बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि विनियम को अविलंब वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में 1 फरवरी को सीताराम आश्रम से चौक तक विरोध मार्च निकालने और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिक्षा मंत्री सहित सवर्ण समाज के नेताओं का सामूहिक पुतलादहन करने का ऐलान किया गया।
बैठक में गुड्डु सिंह, अंजनी कुमार, विनोद, मनीष शर्मा, जितेंद्र नेता, टुनटुन सिंह, चालू भाई, चितरंजन सिंह, दीपक सिंह, मंटू सिंह और संजय सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। बिहटा में उठी यह चिंगारी अब बड़े आंदोलन की आहट के तौर पर देखी जा रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट