
पटना में मौसम का मूड स्विंग, जनजीवन फिर कांपा
सोमवार की सुबह पटना वालों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं थी। आसमान साफ था, धूप खिलकर मुस्कुरा रही थी और लगा मानो ठंड अब विदा लेने वाली है। लोग राहत की सांस लेते हुए घरों से निकले, सड़कों पर चहल-पहल लौटी, बाजार गुलजार हुए और खेतों में फिर से रौनक दिखने लगी।
लेकिन मौसम ने अचानक करवट बदली—और धूप के बीच ही ठंड ने फिर से दस्तक दे दी।
दोपहर होते-होते बर्फीली पछुआ हवा चलने लगी। कुछ ही पलों में कनकनी इतनी बढ़ गई कि लोगों ने फिर से शॉल, जैकेट और टोपी संभाल ली। शाम ढलते ही हालात और बिगड़े—घना कोहरा छाया और सड़कों पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं रहा।

इस बदले मिजाज ने जनजीवन को फिर से झकझोर दिया।
तेज, ठंडी हवाओं ने इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को भी बेहाल कर दिया। खेतों में काम कर रहे मजदूर ठंड से जूझते नजर आए, कई जगहों पर काम की रफ्तार थम सी गई।
ग्रामीण इलाकों में ठंड का असर और भी साफ दिखा।
सुबह-सुबह पशुपालक अपने पशुओं को देर से बाहर निकाल रहे हैं, वहीं शाम होते ही गौशालाओं में अलाव की गर्माहट ढूंढी जा रही है। पशुपालकों का कहना है कि मौसम की इस आंख-मिचौली से पशुओं की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है।
शीतलहर ने पोल्ट्री और मछली पालन को भी नहीं बख्शा।
कई इलाकों में मुर्गियां बीमार पड़ने लगी हैं, जिससे पोल्ट्री कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। तालाबों का पानी जरूरत से ज्यादा ठंडा होने से मछलियों की सक्रियता घट गई है और उत्पादन पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
पटना ही नहीं, पूरा बिहार इस मौसम के मिजाज से जूझ रहा है।
कहीं धूप राहत देती है तो कहीं अचानक ठंडी हवाएं परेशान कर देती हैं। मौसम के इस बदले तेवर ने साफ संकेत दे दिए हैं कि फिलहाल ठंड से छुटकारा आसान नहीं।
👉 ऐसे में जरूरी है सतर्कता—गर्म कपड़े, सावधानी और बदलते मौसम के साथ तालमेल।
क्योंकि इस बार सर्दी, जाने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
