पटना।

रेयर डिजीज अवेयरनेस डे के अवसर पर एम्स पटना ने गुरुवार को रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से जागरूकता एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों, मरीजों और उनके परिजनों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि रेयर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को समय पर पहचान, सुलभ उपचार, आर्थिक सहयोग और सुदृढ़ नीति समर्थन उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने बताया कि विश्वभर में सात हजार से अधिक रेयर बीमारियां चिन्हित हैं, जिनमें लगभग सत्तर प्रतिशत बचपन में ही प्रारंभ हो जाती हैं। अधिकांश बीमारियां आनुवांशिक, गंभीर और दीर्घकालिक होती हैं। समय पर जांच और विशेषज्ञ सुविधाओं की कमी तथा महंगे उपचार के कारण मरीजों को लंबा संघर्ष करना पड़ता है। कार्यक्रम में ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी, थैलेसीमिया मेजर, हीमोफीलिया, गौशर रोग और जन्मजात चयापचय विकारों पर चर्चा की गई। नवजात स्क्रीनिंग, जेनेटिक परामर्श और नियमित फॉलोअप व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि संस्थान रेयर बीमारियों के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। उन्नत जेनेटिक जांच, बहु-विषयक उपचार, अनुसंधान और रेफरल तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार ने बेहतर संस्थागत समन्वय की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम में दूर-दराज से आए बच्चों और उनके परिजनों की उपस्थिति भावनात्मक रही। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त ज्योति कुमारी ने भी अपनी उपस्थिति से सभी को प्रेरित किया। इस अवसर पर डॉ. चंद्र मोहन, डॉ. प्रताप पात्रा, डॉ. अरुण प्रसाद, डॉ. मोनिका अनंत सहित कई चिकित्सक मौजूद रहे।

अजीत कुमार की रिपोर्ट