
बिहटा। देश की एकता और अखंडता को मजबूत आधार देने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर शनिवार को बिहटा में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। किशुनपुर स्थित बिहटा पब्लिक स्कूल में आयोजित समारोह में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और गणमान्य लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में जहां विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता के समर्थन में नारे लगाए, वहीं बिहटा में सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी उठी।

विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. उदय कुमार सिंह ने कहा कि सरदार पटेल की जयंती केवल एक महापुरुष को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भारत के निर्माण में उनके असाधारण योगदान को समझने का दिन है। आजादी के बाद देश के सामने सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में जोड़ने की चुनौती थी। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, राजनीतिक दूरदर्शिता और कुशल नेतृत्व से उन्होंने इस कठिन कार्य को संभव बनाया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने जिस मजबूती से देश की एकता के लिए निर्णय लिए, वह आज भी प्रेरणादायक है। यदि सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री बने होते तो संभवतः कश्मीर की समस्या का समाधान भी किसी अलग तरीके से हुआ होता। यह विचार उनकी नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले व्यक्तित्व के महत्व को दर्शाता है।
विद्यालय की निदेशिका डॉ. सोनी सिंह ने कहा कि सरदार पटेल का व्यक्तित्व केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं था। वे अनुशासन, साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की एकता और सेवा के लिए समर्पित कर दिया। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी उनके जीवन संघर्ष और विचारों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखे, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और जीवन में भी अपनाए। बच्चों को ऐसे महापुरुषों के जीवन से परिचित कराना राष्ट्र के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
समारोह के दौरान बिहटा में सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य प्रतिमा स्थापित करने को लेकर विशेष चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने कहा कि सरदार पटेल जैसे महापुरुष किसी एक कालखंड या पीढ़ी की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की अमूल्य विरासत हैं। उनकी प्रतिमा स्थापित करना केवल उन्हें श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके विचारों, संघर्षों और राष्ट्रनिर्माण में योगदान को जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। जब नई पीढ़ी के नौजवान और आम लोग सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे महापुरुषों की प्रतिमाएं देखते हैं, तो उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के प्रति जिज्ञासा पैदा होती है। लोग उनके जीवन के बारे में जानने, उनके आदर्शों को समझने और उनके नक्शेकदम पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। सरदार पटेल की प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को देश की एकता, अखंडता, साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का संदेश देती रहेगी। वक्ताओं ने कहा कि बिहटा में उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित होना क्षेत्र के लिए गौरव की बात होगी और यह आने वाले समय में युवाओं के लिए प्रेरणास्थली बन सकती है।
कार्यक्रम में समाजसेवी सिद्धनाथ सिंह, विद्यालय की एडमिन यशोदा सिंह, सदानंद सिंह, हिमांशु सर, वीर बहादुर सिंह, अभय सर, रंजीत सर, विवेकानंद सर, अभिषेक सर, सूरज सर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
ब्यूरो रिपोर्ट
