बिहटा। सड़क पर किसी घटना के बाद ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को कितने जवान और बैरिकेड्स लगाने होंगे, इसका अनुमान अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से लगाया जा सकेगा। आईआईटी पटना की तीन छात्राओं ने ऐसी ही तकनीक विकसित कर राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी प्रतियोगिता फ्लिपकार्ट जीआरआईडी 2.0 में पहला स्थान हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से संस्थान के साथ बिहार का नाम भी रोशन हुआ है।

विजेता दल में गणित एवं कंप्यूटिंग की छात्राएं कशिश राय और भूमि गर्ग तथा कंप्यूटर साइंस की छात्रा प्रज्ञा महाजन शामिल हैं। तीनों बीटेक-एमटेक इंटीग्रेटेड ड्यूल डिग्री कार्यक्रम के तृतीय वर्ष में अध्ययनरत हैं। छात्राओं ने अपनी परियोजना को ‘ग्रिडलॉक ओरेकल’ नाम दिया है।

इस तकनीकी समाधान का उद्देश्य ट्रैफिक पुलिस को यह तय करने में मदद करना है कि सड़क पर हुई किसी घटना के कारण यातायात बाधित होने या सड़क बंद करने की कितनी आशंका है। इसके आधार पर पुलिस पहले से ही आवश्यक स्थानों पर जवानों और बैरिकेड्स की तैनाती की योजना बना सकती है। इससे अनावश्यक रूप से संसाधन लगाने की जरूरत कम होगी और यातायात प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

प्रतियोगिता में बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से तैयार किए गए 8,057 वास्तविक घटनाओं के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इसी डेटा के आधार पर छात्राओं ने ऐसा एआई आधारित सिस्टम तैयार किया, जो संभावित यातायात व्यवधान का आकलन करने और संसाधनों की तैनाती से जुड़े फैसले लेने में सहायता करता है।

प्रतियोगिता के मूल्यांकन में इस प्रणाली के इस्तेमाल से संसाधनों की अनावश्यक तैनाती में 86 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। यह तकनीक ट्रैफिक कंट्रोल रूम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां किसी घटना के बाद समय रहते सही निर्णय लेना जरूरी होता है।

आईआईटी पटना की छात्राओं की यह सफलता तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा और वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में किए गए प्रयासों को सामने लाती है।

कलीम अंसारी की रिपोर्ट