
पटना। दानापुर में बैंक अधिकारियों की विशेष आमसभा, 2 और 3 नवंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प; निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग
दानापुर। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए सालों तक मेहनत और तैयारी करने वाले बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों के सामने अब अपने संस्थान के भविष्य को लेकर चिंता खड़ी हो गई है। आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में बैंककर्मियों का आक्रोश सामने आने लगा है। शनिवार को दानापुर के गोला रोड स्थित एक होटल में आयोजित विशेष आमसभा के दौरान अधिकारियों ने निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की। बैंककर्मियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े इस मुद्दे पर उनका विरोध जारी रहेगा।
ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIIDBIOA) की पटना जोन इकाई की ओर से आयोजित इस आमसभा में बिहार और झारखंड की विभिन्न बैंक शाखाओं एवं प्रशासनिक कार्यालयों से आए 100 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में अधिकारियों ने आगामी 2 और 3 नवंबर 2026 को प्रस्तावित दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को शत-प्रतिशत सफल बनाने का आह्वान किया।
60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के फैसले का विरोध:
बैंककर्मियों का विरोध केंद्र सरकार की ओर से आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने की योजना को लेकर है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक के निजीकरण और निगमीकरण का फैसला उनके संस्थान के भविष्य के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन आंदोलन तेज करने की तैयारी में है। आमसभा में सामान्य वर्ग, आरक्षित वर्ग और दिव्यांगजन संवर्ग के अधिकारियों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

सरकार के रवैये पर उठाए सवाल:
कार्यक्रम में एआईबीओए की बिहार स्टेट कमेटी के अध्यक्ष कॉमरेड ज्ञान प्रकाश ने कहा कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश और उसे विदेशी कंपनी के हाथों सौंपने के विरोध में अब निर्णायक लड़ाई का समय आ गया है। उन्होंने बैंक संगठनों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की।
एसोसिएशन के अध्यक्ष कॉमरेड सौरभ कुमार ने कहा कि सरकार के अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने 2 और 3 नवंबर की हड़ताल में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कॉमरेड बुजालाल कुमार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस संघर्ष को अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों के संगठनों का भी समर्थन मिलेगा।

हड़ताल सफल बनाने की तैयारी:
एआईबीओए की बिहार स्टेट कमेटी के महासचिव कॉमरेड नदीम अख्तर ने कहा कि आईडीबीआई बैंक के अधिकारी अपने साथियों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने बिहार और झारखंड में प्रस्तावित हड़ताल को सफल बनाने का भरोसा जताते हुए सरकार से अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की मांग की।
सभा में संगठन के पूर्व महासचिव कॉमरेड डॉ. कुमार अरविंद ने भी विनिवेश विरोधी संघर्ष में वैचारिक और संगठनात्मक सहयोग देने की बात कही। बैठक के अंत में बैंककर्मियों ने निजीकरण के विरोध में एकजुटता दिखाते हुए आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
बैंककर्मियों का कहना है कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का मुद्दा केवल हिस्सेदारी बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बैंक के भविष्य और सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था से भी जुड़ा है। ऐसे में सरकार द्वारा फैसला वापस नहीं लिए जाने पर विरोध और तेज होने के संकेत हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट
