
फुलवारी शरीफ: तेलंगाना के करीमनगर में हुई 84 लाख रुपये के सोना आभूषण लूटकांड की जांच में अपराधियों के संगठित नेटवर्क का खुलासा हो रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस बड़ी वारदात की पटकथा जेल के अंदर से लिखी गई थी और इसे अंजाम देने के लिए बिहार के अलग-अलग जिलों के अपराधियों को जोड़ा गया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, लूट की योजना बनाने वाले अपराधियों ने वारदात के लिए 3 मई यानी नीट परीक्षा का दिन चुना था। उस दिन पुलिस बल का बड़ा हिस्सा परीक्षा ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात था। इसी स्थिति का फायदा उठाकर अपराधियों ने तेलंगाना के करीमनगर स्थित पीएमजे ज्वेलरी शॉप को निशाना बनाया।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि लूट से पहले दुकान की पूरी रेकी कराई गई थी। एक पेंटर को पेंटिंग के काम के बहाने ज्वेलरी दुकान तक पहुंचाया गया, जहां उसने दुकान की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की गतिविधियों और प्रवेश-निकास से जुड़ी जानकारी जुटाई।
सूत्रों के अनुसार, पूर्णिया जेल में बंद लूट गिरोह के सरगना सुबोध और बेऊर जेल में बंद शिवम सिंह के संपर्क से इस पूरे नेटवर्क को तैयार किया गया। जेल से ही अपराधियों को निर्देश दिए गए और वारदात को अंजाम देने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां बांटी गईं।
जांच की कड़ी फुलवारी शरीफ तक पहुंची, जहां से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। खलीलपुरा निवासी गोलू और बौली मोहल्ला निवासी मोहम्मद आदिल पर इस लूटकांड में शामिल होने का आरोप है। तेलंगाना पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई है और उनसे पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है।
बताया जा रहा है कि इस मामले में अब तक पांच आरोपित पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं, जबकि कई अन्य अपराधी अभी फरार हैं। तेलंगाना पुलिस बिहार पुलिस के सहयोग से पटना समेत कई इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जेल के अंदर से चल रहे इस आपराधिक नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं और लूट की रकम व आभूषणों का क्या हुआ। पुलिस को आशंका है कि पूछताछ के बाद इस हाई प्रोफाइल लूटकांड से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट अजीत कुमार
