धमदाहा में एक मरीज की जान जाने के बाद भी अवैध नर्सिंग होमों पर लगाम नहीं लग सकी है। कुछ माह पहले नेहरू चौक स्थित एक निजी नर्सिंग होम में बुखार से पीड़ित मरीज का कथित तौर पर पेट चीरकर ऑपरेशन कर दिया गया था। गलत इलाज के कारण मरीज की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों के हंगामे पर प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम अनुपम कुमार, अंचल अधिकारी कुमार रविंद्र नाथ तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच कर संबंधित नर्सिंग होम को सील कर दिया था।

उस समय प्रशासन ने अवैध नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का दावा किया था। शुरुआती कार्रवाई के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार पर रोक लगेगी, लेकिन समय बीतने के साथ अभियान की रफ्तार थम गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रखंड क्षेत्र में आज भी आधा दर्जन से अधिक अवैध नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं। बिना मानक और विशेषज्ञ डॉक्टरों के इलाज किया जा रहा है, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक मरीज की मौत के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाई थी, तो फिर बाकी अवैध संस्थानों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्षेत्र में चर्चा है कि जिस अभियान की शुरुआत बड़े जोर-शोर से हुई थी, वह अब ठंडे बस्ते में चला गया है। ऐसे में लोगों की निगाहें फिर प्रशासन पर टिक गई हैं कि आखिर कब तक स्वास्थ्य के नाम पर यह खेल चलता रहेगा।

ब्यूरो रिपोर्ट संतोष कुमार