
पटना: बिहार सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 1 अणे मार्ग स्थित आधिकारिक आवास का नाम “लोक सेवक आवास” रखने के निर्णय को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल माना जा रहा है। इस कदम को सुशासन, पारदर्शिता और जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रेटर पटना फाउंडेशन के अध्यक्ष नागेश्वर सिंह स्वराज ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि नया नाम शासन की जनोन्मुखी सोच को प्रतिबिंबित करता है। उनके अनुसार, इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में अधिक जवाबदेही आएगी और सरकार तथा आम जनता के बीच संबंध और मजबूत होंगे।
स्वराज ने इस अवसर पर एक और सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री से पटना सचिवालय का नाम बदलकर “मंत्रालय” करने की मांग की। उनका तर्क है कि विभागों के संचालन में मंत्रियों की मुख्य भूमिका होती है, ऐसे में “मंत्रालय” नाम प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक संरचना को अधिक सटीक रूप में प्रस्तुत करेगा और आम लोगों के लिए भी समझ को आसान बनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह निर्णय जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और प्रशासन को अधिक जनकेंद्रित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
अजीत कुमार की रिपोर्ट
