
पटना।
बिहार में प्रशासनिक कामकाज को तेज और जवाबदेह बनाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। अब राज्य की हर पंचायत में महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को ‘अधिकारी सहयोग शिविर’ लगाया जाएगा, जहां लोगों की शिकायतें दर्ज होंगी और उन्हें 30 दिनों के अंदर निपटाना अनिवार्य होगा।
अधिवेशन भवन में जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि “क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से कोई समझौता नहीं होगा”। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जनता को अब “लटकाने-भटकाने” की प्रवृत्ति बिल्कुल नहीं चलेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सिस्टम को जमीन पर उतारने के लिए सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर डीएम और एसपी रोज सुबह 10 बजे से 1 बजे तक कार्यालय में बैठकर आम लोगों से मिलें, ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। साथ ही ब्लॉक, अंचल और थानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी।
कानून-व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी आपराधिक घटना में 48 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और 12-13 दिनों में ठोस कार्रवाई दिखनी चाहिए। महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई और ‘पुलिस दीदी’ कॉन्सेप्ट को मजबूत करने को कहा।

शराबबंदी और नशा कारोबार पर भी सरकार सख्त नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अवैध शराब और मादक पदार्थों के कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जाए, और इसमें शामिल या संरक्षण देने वाले पुलिस-प्रशासन के लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई हो।
विकास के मोर्चे पर उन्होंने बड़ा लक्ष्य रखते हुए कहा कि राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का टारगेट तय किया गया है। हर जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने और उद्योगपतियों को सुरक्षा व सुविधा देने के निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को बेवजह रेफर करने की प्रवृत्ति खत्म होनी चाहिए। 1 जुलाई तक जिला अस्पताल और 15 अगस्त तक अनुमंडल अस्पतालों को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। राज्य के सभी 533 प्रखंडों में नेतरहाट और सिमुलतला की तर्ज पर मॉडल स्कूल विकसित किए जाएंगे, ताकि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता निजी स्कूलों से बेहतर हो सके।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि “सुशासन का असर जमीन पर दिखना चाहिए, तभी जनता का भरोसा मजबूत होगा”। अब देखना होगा कि प्रशासन इस सख्त संदेश को कितनी गंभीरता से लागू करता है।
ब्यूरो रिपोर्ट
