
काठमांडू। नेपाल की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार करा दिया। दोनों नेताओं पर पिछले साल हुए Gen Z विरोध प्रदर्शनों के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है।
सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में इस मामले को प्राथमिकता से उठाया गया, जहां उच्च स्तरीय जांच आयोग की रिपोर्ट को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व और कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे।
सरकार के प्रवक्ता और विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट में अधिकतम 10 साल की सजा की सिफारिश की गई है, जिस पर अंतिम फैसला अब अदालत करेगी।
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। तत्कालीन पुलिस प्रमुख समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जवाबदेही तय करना उसकी पहली प्राथमिकता है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े कदम देखने को मिल सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट
