
फुलवारी शरीफ की सड़कों पर सोमवार को देशभक्ति, संघर्ष और विचारों की गूंज एक साथ सुनाई दी, जब शहीद-ए-आजम Bhagat Singh के 95वें शहादत दिवस पर साम्राज्यवाद विरोधी मार्च निकाला गया। हाथों में झंडे और दिलों में क्रांति की विरासत लिए सैकड़ों लोग इस ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाने सड़कों पर उतरे।
ईसापुर पुल से शुरू हुआ यह मार्च मुख्य बाजार और थाना रोड होते हुए भगत सिंह चौक तक पहुंचा, जहां उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। शहीद भगत सिंह मेमोरियल कमेटी के अध्यक्ष दिलीप कुमार के नेतृत्व में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें लोगों ने नारे और गीतों के जरिए शहीदों के विचारों को जीवित रखा।
भाकपा माले के बैनर तले निकले इस मार्च का नेतृत्व जिला सचिव कामरेड अमर, पूर्व विधायक गोपाल रविदास, एमएलसी कामरेड शशि यादव, गुरुदेव दास और साधु शरण प्रसाद ने संयुक्त रूप से किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने आयोजन को जनांदोलन का रूप दे दिया।
भगत सिंह चौक पर आयोजित नुक्कड़ सभा में वक्ताओं ने Bhagat Singh के साथ-साथ Shivaram Rajguru और Sukhdev Thapar के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि 23 मार्च 1931 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट है, जब इन क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते फांसी का फंदा स्वीकार किया।
सभा में वर्तमान वैश्विक हालात पर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आज भी दुनिया के कई हिस्सों में साम्राज्यवादी नीतियां कमजोर देशों पर दबाव बना रही हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान को लेकर बढ़ते तनाव पर विरोध जताते हुए शांति और संवाद की जरूरत पर जोर दिया गया।
नेताओं ने चेतावनी दी कि युद्ध और टकराव की स्थिति से ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक संकट गहरा सकता है, जिसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली के लिए ठोस पहल की मांग की।
इस मौके पर जयप्रकाश पासवान, देवी लाल पासवान, नलिन, शरीफा मांझी और मिथिलेश समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने शहीदों को नमन किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान फुलवारी शरीफ का माहौल देशभक्ति, एकजुटता और संघर्ष के जज्बे से सराबोर नजर आया।
अजीत कुमार की रिपोर्ट
