फुलवारी शरीफ।
इस बार रमजान के पाक महीने में एक बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक संजोग देखने को मिला, जब करीब सौ साल बाद ऐसा हुआ कि एक ही रमजान में दो बार अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई. चांद नजर नहीं आने के कारण रमजान की अवधि बढ़ने से यह स्थिति बनी. माना जा रहा है कि ऐसा संजोग अब फिर करीब सौ साल बाद ही देखने को मिलेगा, जिससे यह अवसर और भी खास बन गया और अकीदतमंदों में जबरदस्त उत्साह और भावुकता देखने को मिली.
माहे रमजान के आखिरी जुमा यानी अलविदा के मौके पर फुलवारी शरीफ समेत राजधानी पटना और उसके ग्रामीण इलाकों में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों के बाहर नमाजियों का तांता लगा रहा. नौबतपुर, बिक्रम, पालीगंज, दुल्हिन बाजार, मसौढ़ी, फतुहा, बख्तियारपुर, मनेर, दानापुर, बिहटा, संपतचक, पुनपुन, खुसरूपुर समेत पूरे पटना जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों की मस्जिदों में नमाजियों का सैलाब उमड़ पड़ा.
फुलवारी शरीफ के खानकाह ए मुजीबिया, काजी नगर कॉलोनी, अहमद कॉलोनी, मिन्हाज नगर, शाही संगी मस्जिद, मिल्लत कॉलोनी, बौली, महतवाना, नोहसा, लाल मियां की दरगाह, मिलकियाना, ईसापुर, खलीलपुरा, सबजपुरा, नया टोला, कर्बला, गुलिस्तान मोहल्ला, परसा बाजार, अब्दुल्लाह चक, जानीपुर, अकबरपुर, बेउर और भूसौला दानापुर समेत तमाम इलाकों की मस्जिदों में अकीदतमंदों की लंबी कतारें देखी गईं. कई जगहों पर मस्जिदों के अंदर जगह कम पड़ने के कारण लोगों ने सड़कों, गलियों और छतों पर भी नमाज अदा की.
अलविदा जुमा को छोटी ईद के रूप में भी जाना जाता है, जिसके साथ ही ईद-उल-फितर के आने की खुशी रोजेदारों में साफ झलकने लगी है. नमाज के दौरान बुजुर्गों, नौजवानों और बच्चों की बड़ी भागीदारी रही, जिससे पूरे माहौल में इबादत और भाईचारे की भावना देखने को मिली. नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दी और मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं.
दोपहर बाद शहर और ग्रामीण इलाकों में “अलविदा माहे रमजान” के काफिले निकले, जहां “अलविदा, अलविदा माहे रमजान” की सदा गूंजती रही. उलेमा-ए-कराम ने अपने खुत्बों में रमजान की फजीलत, इंसानियत, आपसी भाईचारा और मोहब्बत का पैगाम देते हुए लोगों से नफरत छोड़कर एकता और शांति के रास्ते पर चलने की अपील की. उन्होंने कहा कि रमजान का यह पाक महीना हमें सब्र, सहनशीलता और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश देता है, जिसे हमें अपनी जिंदगी में उतारना चाहिए.
प्रशासन की ओर से भी व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे. संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल, दंडाधिकारी और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई थी. जगह-जगह पुलिस गश्त करती रही और ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुचारु रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए. अधिकारियों ने बताया कि पूरे जिले में अलविदा जुमा की नमाज शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई.
रमजान के इस आखिरी पड़ाव पर जहां एक ओर अलविदा की हल्की सी उदासी लोगों के चेहरों पर दिखी, वहीं दूसरी ओर ईद-उल-फितर के इस्तकबाल की खुशियां भी पूरे शबाब पर नजर आईं. पूरे जिले में इबादत, भाईचारा और अमन का अनूठा संगम देखने को मिला.

ब्यूरो रिपोर्ट अजीत कुमार