पटना, 19 मार्च: बिहार में राजस्व व्यवस्था इस समय ऐसी ठहरी हुई है मानो गांव-गांव की धड़कन थम गई हो। अंचल कार्यालयों के बंद रहने से न केवल प्रशासनिक कामकाज प्रभावित है, बल्कि आम जनता से लेकर जनप्रतिनिधि तक रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए भटकने को मजबूर हैं। महीनों से जारी इस स्थिति ने ग्रामीण इलाकों में बेचैनी बढ़ा दी है और लोगों का भरोसा व्यवस्था पर डगमगाने लगा है।
दरअसल, पूरे बिहार में अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी हड़ताल पर हैं, जिसके कारण जमाबंदी, दाखिल-खारिज, भूमि विवाद, आय-निवास, ईडब्ल्यूएस जैसे प्रमाण पत्रों का निर्गमन पूरी तरह ठप हो गया है। RTPS सेवाएं भी प्रभावित हैं। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो जमीन खरीद-बिक्री या पारिवारिक आवश्यकताओं—जैसे शादी-विवाह—के लिए जरूरी कागजात नहीं जुटा पा रहे हैं।

हड़ताल का सबसे गंभीर असर भूमि विवादों पर पड़ा है। पहले अंचल स्तर पर जनता दरबार के माध्यम से मामलों का समाधान होता था, लेकिन अब सुनवाई बंद है। इससे ग्राम कचहरियों पर दबाव बढ़ गया है और कई जगहों पर छोटे-छोटे विवाद अब झगड़े और आपराधिक घटनाओं में बदलने लगे हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्य—जैसे आगजनी, फसल क्षति—भी प्रभावित हैं, क्योंकि अंचल अधिकारी ही इन मामलों के नोडल पदाधिकारी होते हैं।

बिहार प्रदेश पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला

बिहार प्रदेश पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि समस्या केवल अंचल तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुमंडल और जिला स्तर पर भी अपीलीय व्यवस्था कमजोर हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उच्च न्यायालय ने पहले ही निर्देश दिया है कि इन पदों पर अनुभवी राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी है, ताकि आम जनता को न्याय के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ विजय सिन्हा के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए जल्द समाधान की मांग की।

सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है। लोग #BiharRevenueStrike और #AanchalBand जैसे हैशटैग के साथ अपनी परेशानी साझा कर रहे हैं। सरकार की ओर से स्थिति सामान्य करने के संकेत जरूर दिए गए हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकल सका है। ऐसे में मांग उठ रही है कि अधिकारियों की जायज मांगों पर जल्द निर्णय लेकर हड़ताल समाप्त कराई जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और प्रशासनिक व्यवस्था फिर से पटरी पर लौटे।

ब्यूरो रिपोर्ट