पटना: चार परिवारों को अपने घर का गंदा पानी निकालने के लिए वर्षों तक जूझना पड़ा। गांव में अधिकांश घरों तक नाली पहुंच गई, लेकिन इन परिवारों के हिस्से में केवल शिकायतें और इंतजार आया। आखिरकार मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी ने भी स्वीकार किया कि संबंधित 80 फीट नाली निर्माण की योजना ग्राम पंचायत विकास योजना में शामिल नहीं की गई थी। अब प्रशासन ने इसे अगले वित्तीय वर्ष की योजना में शामिल कर समयबद्ध तरीके से निर्माण कराने का निर्देश दिया है।

मामला परसा बाजार थाना क्षेत्र के मौलाना बुद्धिचक गांव का है। यहां के निवासी रामचंद्र सिंह ने बताया कि उनके अलावा दिनेश कुमार, उमेश कुमार और मुकेश सिंह के घरों के लिए नाली का निर्माण नहीं कराया गया। जबकि उनके घरों से करीब 75 से 80 फीट की दूरी पर पहले से नाली बनी हुई है। नाली नहीं होने के कारण बरसात के दिनों के साथ-साथ सामान्य दिनों में भी घरों का गंदा पानी सड़क और आंगन में जमा हो जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

समस्या के समाधान के लिए रामचंद्र सिंह ने पहले अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, पटना सदर के समक्ष आवेदन दिया। वहां से संतोषजनक राहत नहीं मिलने पर उन्होंने अपर समाहर्ता सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील की। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर मामला जिलाधिकारी पटना सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के समक्ष पहुंचा।

सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रखंड विकास पदाधिकारी, फुलवारी शरीफ उपस्थित हुए। उन्होंने अपने प्रतिवेदन में बताया कि अपीलकर्ता के घर से करीब 80 फीट की दूरी तक नाली निर्माण की योजना वित्तीय वर्ष 2024-25 की ग्राम सभा में पारित नहीं हुई थी और न ही इसे ग्राम पंचायत विकास योजना में शामिल किया गया था। बीडीओ ने यह भी बताया कि इस योजना को वित्तीय वर्ष 2025-26 की ग्राम सभा में शामिल कर नियमानुसार पूरा कराया जाएगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद द्वितीय अपीलीय प्राधिकार ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को निर्देश दिया कि नाली निर्माण योजना को ग्राम सभा से पारित कर ग्राम पंचायत विकास योजना में शामिल किया जाए और समयबद्ध तरीके से इसका निर्माण सुनिश्चित कराया जाए। इसके साथ ही मामले का निष्पादन कर दिया गया।

हालांकि, यह मामला कई सवाल भी खड़े करता है। आखिर चार परिवारों को एक बुनियादी सुविधा के लिए जिलाधिकारी तक गुहार क्यों लगानी पड़ी? यदि योजना में कमी थी तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और इसके लिए जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई? इस पूरे मामले में स्थानीय पंचायत के मुखिया से पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

ब्यूरो रिपोर्ट विद्यानंद