
पटना हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद सुभाष यादव से जुड़े चर्चित बिहटा जमीन विवाद मामले में सिर्फ एफआईआर रद्द करने का फैसला ही नहीं सुनाया, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने के आरोप में पुलिस अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया। अदालत ने पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), दानापुर के डीएसपी और बिहटा के तत्कालीन थानाध्यक्ष पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। हाईकोर्ट ने माना कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ऐसे तथ्य रखे गए, जो न्यायिक अभिलेखों से मेल नहीं खाते थे।
यह मामला बिहटा थाना कांड संख्या 425/2023 से जुड़ा है। जस्टिस विवेक चौधरी की एकलपीठ ने पूर्व राज्यसभा सांसद एवं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साले सुभाष यादव की आपराधिक रिट याचिका पर अंतिम सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने पाया कि 15 मार्च 2024 को जब इस मामले की सुनवाई हुई थी, तब राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता कोर्ट में मौजूद थे और निजी प्रतिवादी की ओर से भी वकालतनामा दाखिल किया जा चुका था। आदेश में अधिवक्ता का नाम दर्ज नहीं होना केवल कार्यालय की लिपिकीय त्रुटि थी, इसे अनुपस्थिति नहीं माना जा सकता।
इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी गई कि बिना नोटिस दिए मामला निष्पादित कर दिया गया था। इसी आधार पर मामला दोबारा सुनवाई के लिए पटना हाईकोर्ट लौटा। पुनः सुनवाई में मूल रिकॉर्ड की जांच के बाद हाईकोर्ट ने माना कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए गए, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला है। इसी कारण संबंधित पुलिस अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगाया गया।
इसी फैसले के साथ हाईकोर्ट ने सुभाष यादव के खिलाफ दर्ज बिहटा थाना कांड संख्या 425/2023 की एफआईआर भी निरस्त कर दी। अदालत ने अपने पहले के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि पूरा विवाद मूल रूप से जमीन के लेन-देन से जुड़ा सिविल विवाद था, जिसे आपराधिक मुकदमे का रूप देने की कोशिश की गई।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में बेला पंचायत निवासी भीम वर्मा ने आरोप लगाया था कि उनकी सात कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री जबरन कराई गई, रुपये वापस ले लिए गए और रंगदारी व धोखाधड़ी की गई। इसी शिकायत पर सुभाष यादव समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालांकि हाईकोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर इसे आपराधिक मामला नहीं माना और अंततः एफआईआर रद्द कर दी। अब इस फैसले ने न केवल सुभाष यादव को बड़ी राहत दी है, बल्कि न्यायालय के समक्ष सही तथ्यों की प्रस्तुति को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
ब्यूरो रिपोर्ट निशांत कुमार
